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ⓘ मदन मोहन मालवीय. महामना मदन मोहन मालवीय उच्चारण काशी हिन्दू विश्‍वविद्यालयक प्रणेता छलाह सँगे ओ युगक आदर्श पुरुष सेहो छलाह । ओ भारतक पहिल आ एहन अन्तिम व्यक्ति छ ..




                                               

काशी हिन्दू विश्‍वविद्यालय

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय या वनारस हिन्दू विश्वविद्यालय) वाराणसीमे अवस्थित एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय छी । ई विश्वविद्यालयक स्थापना महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय द्वारा सन् १९१६ मे वसन्त पञ्चमीक पवित्र दिनमे भेछल । वर्तमानमे ई विश्वविद्यालयक दुई परिसर अछि । मुख्य परिसर मे विस्तृत ई वाराणसीमे अवस्थित अछि । मुख्य परिसरमे ३ संस्थान, १४ संकाय आ १२४ विभाग अछि। विश्वविद्यालयक दोसर परिसर भारतक मिर्जापुर जिलामे अवस्थित अछि । ई एसियाक सबसँ पैग विश्वविद्यालय मध्ये एक छी ।

                                               

सत्यमेव जयते

सत्यमेव जयते भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है। एकर अर्थ छी: सत्य ही जीतैत अछि / सत्यक जीत अछि। ई भारतक राष्ट्रीय प्रतीक नीचला देवनागरी लिपि में अंकित छी। ई प्रतीक उत्तर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेशम वाराणसीक निकट सारनाथ में 250 ई.पू. मे सम्राट अशोक द्वारा बनवाये गए सिंह स्तम्भक शिखर सँ लेल गेल अछि, लेकिन वहिमे ई आदर्श वाक्य नै अछि। सत्यमेव जयते मूलतः मुण्डक-उपनिषदक सर्वज्ञात मंत्र 3.1.6 है। पूर्ण मंत्र एवंम प्रकार अछि: सत्यमेव जयते नानृतम सत्येन पंथा विततो देवयानः। येनाक्रमंत्यृषयो ह्याप्तकामो यत्र तत् सत्यस्य परमम् निधानम्।। अर्थात अंततः सत्यकी ही जय होती है न कि असत्य की। यही वह मार्ग है जि ...

                                               

राजेसुल्तानपुर

राजेसुल्तानपुर उत्तर प्रदेशक अम्बेडकर नगर जिलासभमे स्थित एकटा प्रमुख कस्बा एव नगर पचायत छी। राजेसुल्तानपुर सन १८७६ सं रियासत बनल आ अहीसं बस्ती आर हसवरक रियासतसभ सेहो जन्मल।

मदन मोहन मालवीय
                                     

ⓘ मदन मोहन मालवीय

महामना मदन मोहन मालवीय उच्चारण काशी हिन्दू विश्‍वविद्यालयक प्रणेता छलाह सँगे ओ युगक आदर्श पुरुष सेहो छलाह । ओ भारतक पहिल आ एहन अन्तिम व्यक्ति छल जिनका महामना क सम्मानजनक उपाधिसँ विभूषित कएल गेछल । पत्रकारिता, आन्दोलक, समाज सुधारक, मातृभाषा तथा भारतमाताक सेवामे अपन जीवन समर्पण केनिहार ओ महान व्यक्तित्व जे विश्वविद्यालयक स्थापना केनए छल जाहिमे हिनकर परिकल्पनामे एहन विद्यार्थीसभ शिक्षित होए जे देशक सेवाक लेल तयार करि देशक शिर गौरवसँ उच्च भऽ सकए । मालवीयजी सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, देशभक्ति आ आत्मत्यागमा अद्वितीय छ्लाह । ई सम्पूर्ण आचरणमे ओ मात्र उपदेशक नै भऽ स्वयं ओ सभक लेल पालन कर्ताकें रुपमे सेहो रहल छल । ओ अपन व्यवहारमे सदैव मृदुभाषी रहल आ कर्म हि हुनकर जीवन छल । अनेको संस्थासभक संस्थापक तथा सफल सञ्चालक रुपमे सेहो अपन नियम कानून व्यवस्थाक सुचारू रखैत ओ कहियो रिस आ द्वेस आ कड़ा स्वरमे किनको मन नै दुखेलक । भारत सरकार द्वारा २४ दिसम्बर २०१४ मे हुनका भारत रत्नसँ सम्मानित कएल गेछल ।