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ⓘ सीता आर जानकी रामायण आर रामकथामे आधारित अन्य रामायणसभ जाहिना रामचरितमानसक मुख्य पात्र छी। सीता मिथिलाक राजा जनकक सबसँ जेठ बेटी छल। उनकर विवाह अयोध्याक राजा दशरथ ..




                                               

होली

होली हिन्दू संस्कृतिमे हरेक वर्षक फागुन शुक्ल पूर्णिमा अर्थात होली पूर्णिमाक दिन मनाएल जाइत अछि । ई पावनि नेपाल", भारत तथा अन्य राष्ट्रसभमे बैसैवला हिन्दूसभक एकटा महत्वपूर्ण पावनि छी । ई पावनि वसन्त ऋतुक फागुन मासमे मनाएल जाइत अछि । होलीमे नेपाली समुदायमे फागु पूर्णिमा आ मिथिलामे फगुवाक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि । होली रङ्गक पावनि छी । होलीक दिन सम्पूर्ण हिन्दूधर्मावलम्बी एक दोसरके विभिन्न प्रकार सँ रङ्ग आ अबीर लगबैत अछि । मिठाई आ पकवान ग्रहण करबैत अछि । होली पावनि मनेवाक पाछा एकटा आओर कारण इतिहास छी । एकटा जनविश्वास अछि जे होलीक दिन पुरान कटुता समाप्त कए आ दुश्मनी सेहो बिसैर लोकसभ एक-दोसर ...

                                               

उर्मिला (रामायण)

उर्मिला हिन्दू महाकाव्य रामायण कऽ एक पात्र छी। ओ मिथिलाक राजा जनक आ माता रानी सुनयनाक बेटी छल। सीता हिनकर पैग बहिन छल, हिनकर विआह रामक अनुज लक्ष्मण सँ भेल। लक्ष्मण आ उर्मिलाक दूटा पुत्र छल जकर नाम - अङ्गद आ चन्द्रकेतु छल। बादमे अङ्गद द्वारा अङ्गदियापुरी आर चन्द्रकेतु द्वारा चन्द्रकान्तापुरीक स्थापना कएल गेछल ।

                                               

माँ

माताके कोनो बच्चाक जन्म देनाए मात्र कर्तव्य आ दायित्व नै छी । ओकरा असल जीवन प्रदान करि समाजक लेल योग्दान द सकै योग्य बनेनाए माताक जिम्मेवारी अन्तर्गत पडैत अछि ।

                                               

मन्दोदरी

मन्दोदरी हिन्दू धर्मग्रन्थ रामायणमे वर्णित राक्षसक राजा रावणक पत्नी छथि । रावण एक धूर्त छल एक पतिब्रता पत्नी छलिन । ओ रावणक बल पराक्रम संग परिचित छलिन अतः ओ सम्भवत अनेकौ नीति पूर्ण तरिकासँ रावणके सम्झावेल प्रयास केने छलिन । ओ पञ्चकन्या मध्ये सेहो एक छथि। अहल्या द्रौपदी सीता तारा मन्दोदरी तथा ।पंचकन्या स्मरेन्नित्यं महापातकनाशनम्।। ई एक संस्कृत पद्यमे ई प्रकारक स्तुति मिलैत अछि । मन्दोदरी महान ऋषि कश्यपक पुत्र मायासुरक गोद लेल पुत्री छलिन, रावणसँ विवाहक पच्यात मन्दोदरीक तीन पुत्र भेल जिनकर नाम मेघनाद अक्षकुमार आ अतिक्य छल ।

                                               

चित्रकूट

चित्रकूट धाम मन्दाकिनी नदीक किनारमे बसल भारतक सभ सँ प्राचीन तीर्थस्थलमे सँ एक छी। उत्तरप्रदेश राज्य अन्तर्गत रहल चित्रकूट ३८.२ वर्ग किलोमीटरक क्षेत्रमे फैलल शान्त आ सुन्दर अछि। चारो दिश सँ विन्ध्य पर्वत श्रृङ्खला आ वन सँ घिरल चित्रकूट क्षेत्रमे अनेक आश्चर्यसभक पहाड अवस्थित अछि । मन्दाकिनी नदीक किनार बनल अनेक घाट आ मन्दिरमे पूरे साल श्रद्धालुसभक आवत-जावत लगल रहैत अछि। मानल जाएत अछि कि भगवान राम, सीता आ लक्ष्मण अपन वनवासक चौदह वर्षमे सँ एगारह वर्ष चित्रकूट मे बितौने छल। ई स्थान पर ऋषि अत्रि आ सती अनसुइया ध्यान केनए छल। ब्रह्मा, विष्णु आ महेश सेहो चित्रकूटमे सती अनसुइयाक घर जन्म लेनए छल ।

                                               

पुष्पक विमान

पुष्पकविमान हिन्दू पौराणिक महाकाव्य रामायणमे वर्णित वायु-वाहन छल । ई विमानक प्रयोग लंकाक राजा रावण करैत छल । ई विमानक उल्लेख सीता हरण प्रकरणमे सेहो मिलैत अछि । रामायणक अनुसार राम-रावण युद्धक बाद श्रीराम, सीता, लक्ष्मण तथा लंकाक नवघोषित राजा विभीषण तथा अन्य बहुत लोकसभ सहित लंकासँ अयोध्या आएल छल । ई विमान मूलतः धनक देवता, कुबेरक छल मुदा रावण अपन छोट भाए कुबेरसँ बलपूर्वक ओकर नगरी सुवर्णमण्डित लंकापुरी तथा इ विमान छीन लेनए छल । अन्य ग्रन्थसभमे उल्लेख अनुसार पुष्पक विमानक प्रारुप आ निर्माण विधि अङ्गिरा ऋषिद्वारा कएल गेल तथा एकर निर्माण आ सजावट देव-शिल्पी विश्वकर्माद्वारा कएल गेछल । भारतक प्राची ...

                                               

हनुमान

हनुमान ; परमेश्वरक भक्ति कs सबसँ लोकप्रिय अवधारणा आ भारतीय महाकाव्यक रामायणमे सबस महत्वपूर्ण व्यक्तिसभमे प्रधान अछि। किछ विचारक अनुसार भगवान शिवजी कs ११अम रुद्रावतार, सबसँ बलवान आ बुद्धिमान मानल जाएत अछि । जे हुनकर सबसँ प्रसिद्ध उपलब्धि छथि, जेहन रामायणमे वर्णित छै, बानरक सेनाक अग्रणी रूपमे राक्षस राजा रावण सँ युद्ध । परन्तु बहुतो विद्वान सभक अनुसार हनुमान जी कs जाति वानर बताओल गेल अछि। जकर जीवित उदाहरण अछि विराट नगर मे स्थापित पञ्चखण्डपीठ पावन धाम स्थित बजरंग मन्दिर । गोभक्त महात्मा रामचन्द्र वीर कs समूचा हिन्दुस्तानमे विश्व कs सबसँ अलग मन्दिर स्थापित केलक जहिमे हनुमान जी कs बिना बानर वाल ...

                                               

लक्ष्मण

लक्ष्मण रामायणक एक आदर्श पात्र छी। हिनका शेषनागक अवतार मानल जाइत अछि। रामायणक अनुसार, राजा दशरथ, माता सुमित्राक तेसर पुत्र आ रामक भाई छल। ई दूनु भाईसभमे अपार प्रेम छल। ओ राम-सीताक सङ्ग १४ वर्षक वनवास गेल छल। हिन्दू मन्दिरसभ मे श्री राम आ सीता जी कऽ साथ सदैब हिनकर सेहो पूजा होएत अछि। हिनकर अन्य भाई भरत आ शत्रुघ्न छल।

                                               

जनक

जनक मिथिलाक ऐतिहासिक राजा छी । जनक वैदिकक राजासबक उल्लेख केल जाएवाला नाम छी । वैदेह राजा ऋगवैदिक कालक नमी सप्याक नामसँ छलाह, यज्ञ करैत सदेह स्वर्ग गेलाह, ऋगवेदमे वर्णन अछि । ओ इन्द्रकसंग देलन्हि असुर नमुचीक विरुद्ध आ ताहिमे इन्द्र हुनका बचओलन्हि । शतपथ ब्राह्मणक विदेघमाथव आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ। माथवक पुरहित गौतम मित्रविन्द यज्ञक/ बलिक प्रारम्भ कएलन्हि आ पुनः एकर पुनःस्थापना भेल महाजनक-२ क समयमे याज्ञवल्क्य द्वारा । निमि गौतमक आश्रमक लग जयन्त आ मिथि -जिनका मिथिला नामसँ सेहो सोर कएल जाइत छन्हि, मिथिला राज्यक निर्माण कएलन्हि। स ...

                                               

नासिक

नासिक या नाशिक भारतक महाराष्ट्र राज्यमे अवस्थित एक शहर छी। नासिक महाराष्ट्रक उत्तर पश्चिममे, मुम्बई सँ १५० किमी आ पुणे सँ २०५ किमीक दुरीमे अवस्थित अछि। ई शहर मुख्य रूपसँ हिन्दू तीर्थयात्रिसभक प्रमुख केन्द्र छी। नासिक पवित्र गोदावरी नदीक सतह पर स्थित अछि। समुद्रक मानक अनुसार एकर ऊँचाई ५६५ मीटर अछि। गोदावरी नदीक किनापर बहुत सुन्दर-सुन्दर सन घाट अवस्थित अछि। ई शहरक सभसँ प्रमुख भाग पञ्चवटी छी। एही ठाम बहुतो मन्दिर सेहो अछि। नासिकमे पावनिसभक समयमे बहुत बेसी सङ्ख्यामे भीड़ देखल जाएत अछि।

सीता
                                     

ⓘ सीता

सीता आर जानकी रामायण आर रामकथामे आधारित अन्य रामायणसभ जाहिना रामचरितमानसक मुख्य पात्र छी। सीता मिथिलाक राजा जनकक सबसँ जेठ बेटी छल। उनकर विवाह अयोध्याक राजा दशरथक ज्येष्ठ सुपुत्र रामसँ स्वयंवरमे शिवक धनुष तोडलाक बाद भेल छल।

भगवान् मर्यादा पुरूषोत्तम रामक पत्नी, धर्मानुरागी, आदर्शराजा दशरथक पुताहू आर राजषिर् जनकक बेटी सीता भूमिक गरिमामयी पुत्री छी। आदर्शपत्नी, आदर्शमाता, आदर्श भाउज, आदर्श पुताहू, आदर्श महारानी आर समग्रमे कही त आदर्श नारीक रूपमे बहुचर्चित सीता विभूति छी। उनकर आदर्श, सच्चरित्रता, सतीत्व, नारीत्व, मातृत्वासल्य, करूणामयी व्यक्तित्वक कारण संसारभर उनका जगज्जननीक रूपमे पुजैत अछी।

अनसूया
                                               

अनसूया

अनसूया दक्ष प्रजापतिक चौबीस कन्यासभ मद्धे एक तथा अत्रि ऋषिक पत्नी छलिन। अनसूया राम, सीता आ लक्ष्मणके अपन आश्रममे स्वागत केने छलिन । हुनका सीताके उपदेश देने छलिन आ सीताके अखण्ड सौन्दर्यताएक ओषधि सेहो देने छलिन । उनी भगवान् दत्तात्रेयक माता छल ।