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ⓘ पाल वंश. पाल साम्राज्य साम्राज्यवादी शक्ति छल, जे पूर्व प्राचीन समयमे भारतीय उपमहाद्वीपमे अवस्थित छल, जकर उत्पति बङ्गालमे भेल। एकरसभक नाम एकर शासक वंशक नाम पर र ..




                                               

पाल (बहुविकल्पी)

Palas, Turkey, a town in Turkey Las Palas, a town in Spain Palas, Kohistan, a valley in Pakistan Palas, Iran, a village in Iran Palas, a former commune, nowadays a neighbourhood in Constanța, Romania

पाल वंश
                                     

ⓘ पाल वंश

पाल साम्राज्य साम्राज्यवादी शक्ति छल, जे पूर्व प्राचीन समयमे भारतीय उपमहाद्वीपमे अवस्थित छल, जकर उत्पति बङ्गालमे भेल। एकरसभक नाम एकर शासक वंशक नाम पर राखल गेल अछि, जकर शासककेँ नामक अन्तमे पाल प्रत्यय लागल रहैत अछि । ओसभ महायाना आ तान्त्रिक बुद्ध विद्यालयकेँ अनुसरण करैत छल। ई साम्राज्यक स्थापना चुनावद्वारा गोपाल सम्राटक रुपमे गौड़मे ७५०म् आम युगमे भेल छल। पाल सभक गढ़ बङ्गाल आ बिहार छी, जाहिकेँ प्रमुख शहरसभ विक्रमपुर, पाटलीपुत्र, गौड़, मुङ्गेर, सोमपुर, रामवत्ति, ताम्रलिप्त आ जगद्दल छल।

पालसभ चतुर कुटनीतिज्ञ आ सैन्य विजेता छल। हुनकर सभक सेना अप्पन विशाल युद्ध हाथी लेल विख्यात छल। हिनकरसभक नौसेना बङ्गालक खाड़ीमे व्यापारिक आ रक्षात्मक भूमिका प्रदान केनए अछि। पालसभ शास्त्रीय भारतीय दर्शनक महत्वपूर्ण प्रवर्तक छल, साहित्य, चित्रकला, आ मूर्तिकला। ओसभ भव्य मन्दिर आ मठक निर्माण केनए छल, सोमपुरा महाविहार सहित, नालन्दा आ विक्रमशिलाक महान विश्वविद्यालयसभक संरक्षण केलक। प्रोटो-बङ्गाली भाषा पाल नियमक तहत विकसित भेल। ई साम्राज्य श्रीविजय साम्राज्य, तिब्बती साम्राज्य आ अरब खिलाफत ए अब्बासियाक सङ्ग सम्बन्धक आनन्द लेलक। पालसभक सम्बन्धमे पुरातात्विक स्थलक सङ्गेसङ्ग अरबक इतिहासकारक अभिलेखसभमे पाओल गेल अब्बासिदक सिक्का, समृद्ध आ बौद्धिक सम्पर्कक इङ्गित करैत अछि। बगदादमे हाउस अफ विजडम एहि अवधिक समय भारतीय सभ्यताक गणितीय आ खगोलीय उपलब्धिसभकेँ अवशोषित केलक।

९म् शताब्दीक शुरुमे पाल साम्राज्य उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीपक प्रमुख शक्ति छल आ एकर क्षेत्र आधुनिक-पूर्वी पाकिस्तान, भारत, नेपाल आ बङ्गलादेशक भूभागसभमे पसरल छल। सम्राट धर्मपाल आ देवपालक तहत ई साम्राज्य अपन चरम पर पहुँचि गेल छल। पालसभ तिब्बतमे अतीश दीपङ्करक सङ्ग-सङ्ग दक्षिण पूर्व एशियामे सेहो एकटा मजबूत सांस्कृतिक प्रभाव छोड़लक। उत्तर भारतमे पालसभक नियन्त्रण अन्ततः अल्पकालिक छल, किआकी ओसभ कन्नौजक नियन्त्रणक लेल गुर्जर प्रतिहार आ राष्ट्रकूट सङ्ग सङ्घर्ष केलक आ पराजित भेल। अल्पकालिक गिरावटक बाद, सम्राट महिपाल प्रथम दक्षिण भारतीय चोल आक्रमणक विरुद्ध बङ्गाल आ बिहारमे शाही गढ़सभकेँ बचाव केलक। सम्राट रामपाल अन्तिम मजबूत पाल शासक छल, जे कामरूप आ कलिङ उपर नियन्त्रण प्राप्त केलक। ११म् शताब्दीधरि ई साम्राज्य विद्रोहमे संलग्न कतेकौँ क्षेत्रक सङ्ग बहुत कमजोर भऽ गेल छल।

पुनरुत्थान हिन्दू सेन राजवंशसभ १२म् शताब्दीमे पाल साम्राज्यकेँ अलग कऽ देलक, जे भारतीय उपमहाद्वीपमे अन्तिम प्रमुख बौद्ध साम्राज्य शासनक अन्त कऽ देलक। पाल कालक बङ्गाली इतिहासक स्वर्ण युगसभमे एकटा मानल जाएत अछि। पालसभ युद्ध विभाजनक बीच कतेकौँ शताब्दी बाद बङ्गालमे स्थिरता आ समृद्धि आनलक। ओसभ पहिलुक बङ्गाली सभ्यताकेँ उपलब्धिसभक आगा बढ़ेलक आ कला आ वास्तुकलाकेँ उत्कृष्ट कार्य केलक। ओसभ बङ्गाली भाषाक लेल आधार तैआर केलक, जाहिमे एकर पहिल साहित्यिक कार्य, चर्यापद सेहो शामिल अछि। पाल विरासत एखनो तिब्बती बौद्ध धर्ममे परिलक्षित होएत अछि।

                                     

1.1. इतिहास मूल

खालिमपुर तांबा के प्लेटक शिलालेख के अनुसार, पहिने पाल राजा गोपाल, वेपता नामक योद्धा के पुत्र छल ।"रामचरितम" मे कहलगेल अछि कि वरेन्द्र उत्तर बंगाल पालसभक जन्मभूमि "जनकभु" छल। राजवंश के जातीय उत्पत्ति अज्ञात अछि, हालांकि हालके रिकॉर्ड इ दावा करैत अछि कि गोपाल एक क्षत्रिय पौराणिक सौर वंश सऽ संबंधित छल। बल्लाला-कारिता मे कहलगेल अछि कि पाल क्षत्रिय छल, तरानाथ हुनकर भारत मे बौद्ध धर्म के इतिहास के संग-संग घनाराम चक्रवर्ती के हुनकर के राजेंद्र चोल प्रथम गंगा के पानि प्राप्त करए लेल १०२१ सऽ १०२३ सी इ तक बंगाल पर प्रायः आक्रमण केलक आ अहि प्रक्रिया मे, शासक सभके नीचा देखाबए मे सफल रहल, जे काफी लूटक शिकार भेल। ओ बंगाल के शासक छल जिनका राजेंद्र चोल हरौने छल, धर्मपाल, राणासुर आ गोविंदचंद्र छल, जे शायद पाल वंश के महिपाल प्रथम के अधीन सामंत छल। राजेंद्र चोल प्रथम सेहो महिपाल के हरौलक, आ पाल राजा सऽ प्राप्त केलक "दुर्लभ शक्तिवला हाथी, जनानीसभ आ खजाना"।महिपाल उत्तर आ दक्षिण बिहारक नियंत्रण प्राप्त केलक, संभवतः गजनी के महमूद के आक्रमण सऽ सहायता प्राप्त केलक, जे उत्तर भारत के अन्य शासक सभक ताकत के समाप्त कऽ देलक। ओ वाराणसी आ आस-पास के क्षेत्पर सेहो विजय प्राप्त केलक, किआकी हुनकर भाई शरतपाल आ वसंतपाल वाराणसी मे कतेकौं पवित्र संरचना सभक निर्माण आ मरम्मत के काज केलक। बाद मे, कलचुरि के राजा गांगेयदेव अंग के शासक के पराजित केलाबाद वाराणसी के खंडित कदेलक, जे महिपाल प्रथम भऽ सकै छल।

                                     

1.2. इतिहास पतन के द्वितीय चरण

महिपाल प्रथम के पुत्र नयापाल लंबा संघर्ष के बाद कलचुरी राजा कर्ण गंग्यदेव के पुत्र के हरौलक। बाद मे दुन्नु बौद्ध विद्वान अतिसा के मध्यस्थता मे एकटा शांति संधि पर हस्ताक्षर केलक। नयापाल के पुत्र विग्रहपाल तृतीय के शासनकालक दौरान, कर्ण एकबेर फेर बंगाल पर आक्रमण केलक लेकिन ओ हारिगेल । एकटा शांति संधि के संग संघर्ष समाप्त भेल, आ विग्रहपाल तृतीय कर्ण के बेटी यवनश्री सऽ विवाह केलक। विग्रहपाल तृतीय के बाद मे आक्रमण चालुक्य राजा विक्रमादित्य छवम् हरौने छल । विक्रमादित्य छवम् के आक्रमण दक्षिण भारत के कतेकौं सैनिकसभके बंगाल में देखलक, जे कि दक्षिण राजवंश के दक्षिणी मूल के बताबैत अछि। विग्रहपाल तृतीय के उड़ीसा के राजा महाशिवगुप्त ययाति के सोमवि वंश: सोमवमसी के नेतृत्व मे एक आर आक्रमण के सामना करए पड़ल।अहिके बाद, आक्रमण सभक एक श्रृंखला पाल के शक्ति काफी कम कदेलक। वर्मनसभ हुनका शासनकाल के दौरान पूर्वी बंगाल पर कब्जा कलेलक।

विग्रहपाल तृतीय के उत्तराधिकारी महिपाल द्वितीय सैन्य गौरव के अल्पकालिक शासन केलक। हुनकर शासनकाल रामचरितम मे संधीकर नंदी द्वारा निक ढंग सऽ प्रलेखित अछि। महिपाल द्वितीय अपन भाइसभ रामपाल आ सुरपाल द्वितीय के अहि संदेह मे कैद कदेलक कि ओसभ हुनक खिलाफ साजिश करैछल। अहि के तुरंत बाद, ओ एक काबार्ट से जागीरदार प्रमुखक विद्रोह मलाह के सामना केलक। दिव्य वा दिववोका नामक एक प्रमुख हुनका मारि देलक आ वरेन्द्र क्षेत्पर कब्जा कलेलक। इ क्षेत्र हुनक उत्तराधिकारिसभ रुडक आ भीम के नियंत्रण मे रहल। सुरपाल द्वितीय मगध भाग गेल आ एकटा छोट शासनकाल के बाद हुनकर मृत्यु भगेल । ओ अपन भाई रामपाल द्वारा सफल भगेल, जे दिव्या के पोता भीम के खिलाफ एकटा बड़का हमला केलक। हुनका राष्ट्रकूट वंशक हुनकर मामा, संगमे दक्षिण बिहार आ दक्षिण-पश्चिम बंगाल के कतेकौं सामंती प्रमुख सभक समर्थन प्राप्त छल। रामपाल निर्णायक रूप सऽ भीम के हरा देलक, हुनका आ हुनकर परिवार के क्रूर तरीका सऽ मारि देलक।

                                     

1.3. इतिहास रामपाल के अधीन पुनरुद्धार

वरेंद्पर नियंत्रण पेलाबाद, रामपाल सीमित सफलता के संग पाल साम्राज्य के पुनर्जीवित करएके कोशिश केलक।ओ रामवती मे एकटा नबका राजधानी सऽ शासन केलक, जे राजवंश के अंत तक पाल राजधानी छल। ओ कर के कम केलक, खेती के बढ़ावा देलक आ सार्वजनिक उपयोगिता सभक निर्माण केलक। ओ अपन नियंत्रण मे कामरुपा आ रार लेलक आ पूर्वी बंगाल के वर्मन राजा के अपन अधीनता स्वीकार करएलेल मजबूर केलक। ओ वर्तमान मे उड़ीसा के नियंत्रणक लेल गंगा राजा के संग संघर्ष केलक; गंगा हुनक मृत्यु के बादे इ क्षेत्र के उपभवन करए मे सफल रहल। रामपाल चोल राजा कुलोत्तुंगा के संग सामान्य शत्रु: गण आ चालुक्य: के खिलाफ सुरक्षित समर्थनक लेल मैत्रीपूर्ण संबंध बनेने रहल। ओ सेना सभके रोकि के राखलक, लेकिन मिथिला के कर्नाटकक एक प्रमुख नान्यदेव के नाम सऽ हारि गेल। ओ एकटा वैवाहिक गठबंधन के माध्यम सऽ गढ़वाला शासक गोविंदचंद्र के आक्रामक डिजाइन के सेहो अपनेलग राखलक।

                                     

1.4. इतिहास अंतिम पतन

रामपाल अंतिम मजबूत पाल शासक छल । हुनक मृत्यु के बाद, हुनकर बेटा कुमारपाल के शासनकालक दौरान कामरुपा मे विद्रोह शुरू भगेल। वैद्यदेव द्वारा विद्रोह के लतखुर्दैन कऽ देलगेल छल, लेकिन कुमारपालक मृत्यु के बाद, वैद्यदेव व्यावहारिक रूप सऽ एक अलग राज्य बनेलक। रामचरितम के अनुसार, कुमारपालक पुत्र गोपाल तृतीय के हत्या हुनकर कक्का मदनपाल केने छल। मदनपाल के शासनक दौरान, पूर्वी बंगाल मे वर्मनसभ स्वतंत्रता के घोषणा केलक, आ पूर्वी गंगा उड़ीसा मे संघर्षक नवीनीकरण केलक। मदनपाल मुंगेपर गढ़वाला सऽ कब्जा कऽ लेलक, लेकिन विजयसेना द्वारा पराजित कएलगेल, जे दक्षिणी आ पूर्वी बंगाल पर नियंत्रण हासिल कऽ लेलक। गोविंदपाल नामक एक शासक ११६२ ईस्वी के आसपास गया जिल्ला पर शासन केलक, लेकिन शाही पाल सभक संग हुनकर संबंध के बारे मे कोनो ठोस सबूत नहि अछि। पाल राजवंश सेना राजवंश मे बदलि गेल।

                                     

2. भूगोल

पाल साम्राज्यक सीमासभ अपन पूरा अस्तित्व मे उतार-चढ़ाव करैत रहल। यद्यपि पाल एक समय मे उत्तर भारत मे एकटा विशाल क्षेत्पर विजय प्राप्त केलक, लेकिन ओ बहुत समय धरि गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट आ अन्य कम शक्तिशाली राजा सभसऽ निरंतर शत्रुता के कारण एकरा काएम नहि राखिसकल।

गोपाल द्वारा स्थापित मूल राज्यक सटीक सीमा सभक बारे मे कोनो रेकॉर्ड उपलब्ध नहि अछि, लेकिन अहिमे बंगाल क्षेत्र के लगभग सभ शामिल भसकैत अछि। पाल साम्राज्य धर्मपालक शासन मे काफी विस्तार कएलगेल।बंगालक अलावा, ओ वर्तमान बिहापर सीधा शासन केलक। कन्नौज वर्तमान उत्तर प्रदेश राज्य कतेक बेर पाल पर निर्भर छल, जे हुनक नामपर चक्रवर्ती द्वारा शासित छल। कन्नौज के सिंहासन पर अपन उम्मीदवार के स्थापित करैत, धर्मपाल एकटा शाही अदालत के आयोजन केलक। धर्मपाल द्वारा जारी खालिमपुर तांबा के थारीक अनुसार, अहि दरबार मे भोज के शासक संभवतः विदर्भ, मत्स्य जयपुर क्षेत्र, मद्रा पूर्वी पंजाब भाग लैतछल।, कुरु दिल्ली क्षेत्र, यदु संभवतः पंजाब मे मथुरा, द्वारका वा सिम्हपुरा, यवन,अवंती, गांधार आ कीरा कांगड़ा घाटी। इ राजासभ कन्नौज के सिंहासन पर चक्रायुध के स्थापना स्वीकार केलक, जखनकी "हुनक तिरस्कार के सँग सम्मानपूर्वक झुकल"। इ इंगित करैत अछि कि एकटा शासक के रूप मे हुनक स्थिति के अधिकांश शासकसभ द्वारा स्वीकार कएलगेल छल, हालांकि इ मौर्य वा गुप्त के साम्राज्यक विपरीत एक सुस्त व्यवस्था छल। अन्य शासकसभ धर्मपाल के सैन्य आ राजनीतिक वर्चस्व के स्वीकार केलक, लेकिन अपन स्वयंक क्षेत्र के बनेने रहल। गुजरात के कवि सोढाला धर्मपाल के उत्तर भारत पर अपन आत्मीयता के लेल उत्तरापथस्वामि "उत्तर का भगवान" कहलक।

महाकाव्यात्मक रेकॉर्ड देवपला के अतिशयोक्तिपूर्ण भाषा मे व्यापक विजय के संग दर्ज करैत अछि। हुनक उत्तराधिकारी नारायण पाल के बादल स्तंभ शिलालेख मे कहलगेल अछि कि हुनक ब्राह्मण मंत्री दरभापानी के बुद्धिमान वकील आ नीति सऽ, देवपाल विंध्य आ हिमालय सऽ बान्हल उत्तरी भारत के पूरा पथ के सुजैन सम्राट वा चक्रवर्ती बनि गेल। अहिमे इहो कहलगेल अछि कि हुनकर साम्राज्य दु महासागरसभ संभवतः अरब सागर आ बंगाल के खाड़ी तक विस्तृत छल। इहो दावा अछि कि देवपाल उत्कल वर्तमान उड़ीसा, हुनस, कम्बोज, द्रविड़ के हरौलक। वर्तमान असम, आ गुर्जर

  • कम्बोज के राजकुमारक पहिचान सेहो अनिश्चित अछि। जखन कि नाम के संग एकटा प्राचीन देश कंबोजा एखन अफगानिस्तान मे स्थित अछि, अहि बात के प्रमाण नहि अछि कि देवपाल के साम्राज्य एखनतक बढ़ल छल। कम्बोज, अहि शिलालेख मे, कम्बोज जनजाति के उल्लेख कऽ सकैत अछि जे उत्तर भारत मे प्रवेश कऽ चुकल छल देखु काम्बोजा पाल वंश।
  • गुर्जर विरोधी संभवतः मिहिर भोज छल, जिनक पूर्ववर्ती विस्तारक परिक्षण देवपाल केने छल ।
  • द्रविड़ राजा के पहचान आमतौपर राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष के संग कएलजाएत अछि । किछ विद्वान सभक मत अछि कि द्रविड़ राजा पांड्य शासक श्री मारा श्री वल्लभ भसकैछल, किआकी "द्रविड़" आमतौपर कृष्णा नदी के दक्षिण मे स्थित क्षेत्र के संदर्भित करैत अछि। अहि सिद्धांत के अनुसार, चंदेला राजा विजय द्वारा अपन दक्षिणी अभियान मे देवपालक मदद कएल जाए सकैछल। कोनो मामला मे, दक्षिण मे देवपाल के लाभ, जौं किओ होए, अस्थायी छल।
  • हुना राजा के पहिचान अनिश्चित अछि।

देवपाल के जीतक बारे मे दावा अतिरंजित अछि, लेकिन एकरा पूरपुरी खारिज नहि कएल जाए सकैत अछि: उत्कल आ कामरूप के अपन विजय पर संदेह करएके कोनो कारण नहि अछि। अहिके अलावा, राष्ट्रकूट आ गुर्जर-प्रतिहार के पड़ोसी राज्य ओहि समय कमजोर छल, जे शायद हुनका अपन साम्राज्य के विस्तार करएमे मदद केलक। मानल जाति अछि कि पंजाब मे सिंधु नदी तक सेना के नेतृत्व कएल जाएत अछि।

देवपालक मृत्यु के बाद साम्राज्य के विघटन शुरू भगेल, आ हुनक उत्तराधिकारी नारायणपाल असम आ उड़ीसा के नियंत्रण गुमौलक। ओ मगध आ उत्तर बंगाल पर किछ समय के लेल नियंत्रण गुमौलक। गोपाल द्वितीय बंगाल पर नियंत्रण गुमौलक, आ केवल बिहारक एक हिस्सा सऽ शासन केलक। पाल साम्राज्य के विग्रहपाल द्वितीय के शासनकालक दौरान छोट राज्यसभ मे विघटन भेल। महिपाल बंगाल आ बिहार के किछ हिस्सा बरामद केलक। ओकर उत्तराधिकारिसभ बंगाल के फेर गुमौलक। अंतिम मजबूत पाल शासक, रामपाल बंगाल, बिहार, असम आ उड़ीसा के किछ हिस्सा पर नियंत्रण प्राप्त केलक। मदनपालक मृत्यु के समय धरि, पाल राज्य उत्तरी बंगाल के संग-संग मध्य आ पूर्वी बिहार के किछ हिस्सा धरि मात्र सीमित छल।



                                     

3. शासन प्रबंध

पाल शासन राजतंत्रीय छल। राजा सभटा शक्ति के केंद्र छल। पाल राजा परमेश्वर, परमवतारक, महाराजाधिराज सनक शाही खिताब अपनाबै छल। पाल राजासभ प्रधान मंत्री नियुक्त केलक। गार्ग के रेखा १०० वर्ष धरि पाल के प्रधानमंत्रिसभ के रूप मे कार्य केलक।

  • दरवपानी वा दरभपानी
  • सोमेश्वोर
  • गार्ग
  • केदारमिश्र
  • भट्ट गौरवमिश्र

पाल साम्राज्य अलग भुक्ति प्रांतों मे विभाजित छल। भुक्तिसभ के विभास विभाजन आ मंडला जिल्ला मे विभाजित कएलगेल। छोट इकाइसभ खंडाला, भगा, अव्रीति, चतुरका आ पट्टका छल। प्रशासन जमीनी स्तर सऽ शाही अदालत तक व्यापक क्षेत्र के कवर केलक।

पाल ताम्रपत्र सभमे निम्नलिखित प्रशासनिक पदक उल्लेख अछि:

                                     

4.1. संस्कृति धर्म

पालसभ महायान बौद्ध धर्म के संरक्षक छल। गोपालक मृत्यु के बाद किछ सूत्रसभ हुनका बौद्ध के रूप मे उल्लेख केने अछि, लेकिन इ सच अछि कि इ ज्ञात नहि अछि। बादक पाल राजा निश्चित रूप सऽ बौद्ध छल। तरानाथ कहैत अछि कि गोपाल एक कट्टर बौद्ध छल, जे ओदंतपुरी मे प्रसिद्ध मठ के निर्माण केने छल। आकृति:Failed verification धर्मपाल बौद्ध दार्शनिक हरिभद्र के अपन आध्यात्मिक उपदेशक बनेलक। ओ विक्रमशिला मठ आ सोमपुरा महाविहार के स्थापना केलक। तरानाथ हुनका ५०टा धार्मिक संस्थान सभक स्थापना आ बौद्ध लेखक हरिभद्र के संरक्षणक श्रेय सेहो देने अछि। देवपाल सोमपुरा महाविहार मे संरचना सभक जीर्णोद्धार आ विस्तार केलक, जाहिमे महाकाव्यसभ रामायण आ महाभारत सऽ कत्त्ते थीम अछि। महिपाल प्रथम सारनाथ, नालंदा आ बोधगया मे कतेकौं पवित्र संरचना सभक निर्माण आ मरम्मत के आदेश देलक। हुनकाबारे मे लोक गीतसभ महीपाल गीत "महीपालक गीत" एखनो बंगालक ग्रामीण इलाका मे लोकप्रिय अछि।

पालसभ विक्रमशिला आ नालंदा विश्वविद्यालसभ के बौद्ध केंद्रमे विकसित केलक। नालंदा, जकरा रेकॉर्ड इतिहास मे पहिल महान विश्वविद्यालय सभमे एक मानल जाइत अछि, पाल के संरक्षण मे अपन ऊंचाई पर पहुँचगेल। पाल काल के प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान सभमे अतीशा, संतराक्षिता, सराहा, तिलोपा, बिमलमित्र, वंशी, जिनमित्र, ज्ञानसमित्रा, मंजुघोष, मुक्तिमित्र, पद्मनावा, सम्भोगबज्र, शांतारक्षित, सिलभद्र, सुगताश्री आ विरचन शामिल अछि।

गौतम बुद्ध के शासकक रूप मे, पाल बौद्ध जगत मे बहुत प्रतिष्ठा प्राप्त केलक। बालापुत्रदेवा,जावा के शैलेन्द्र राजा, हुनका एकटा राजदूत पठेलक, जे नालंदा मे एकटा मठके निर्माण लेल पाँच गामक अनुदान देबाक लेल कहैत। देवपालद्वारा विन्ती स्वीकार कएलगेल। ओ ब्राह्मण वीरदेव नगरहारा, वर्तमान जलालाबाद के नालंदा मठक प्रमुख नियुक्त केलक। बौद्ध कवि वज्रदत्त लोकेश्वराष्टक के लेखक, हुनक दरबार मे छल। पाल साम्राज्य के बौद्ध विद्वान सभ बौद्ध धर्म के प्रचारक लेल बंगाल सऽ अन्य क्षेत्रक यात्रा केलक। उदाहरणक लेल, आतिशा तिब्बत आ सुमात्रा मे प्रचार केलक, आ ११ म् शताब्दी के महायान बौद्ध धर्मक प्रसार मे एक प्रमुख व्यक्ति के रूप मे देखल जाइत अछि।

पाल शैव तपस्वि सभक समर्थन केलक,खासकऽ गोलगी-मठ सऽ जुड़ल लोक। नारायण पाल स्वयं शिव के एकटा मंदिर स्थापित केलक, अपन ब्राह्मण मंत्री द्वारा बलिदान के स्थान पर। राजा मदनपालदेव के रानी, चित्रमटिका द्वारा, भूमिचरिद्रय के सिद्धांतक अनुसार, महाभारत जप के लेल अपन पारिश्रमिक के रूप मे बटेश्वर स्वामी नामक एक ब्राह्मण कऽ भूमि उपहार देलक। The art of Bihar and Bengal during the Pala and Sena dynasties influenced the art of Nepal, Burma, Sri Lanka and Java.



                                     

5. सैन्य

पाल साम्राज्य मे सर्वोच्च सैन्य अधिकारी महासेनापति सेनापति-प्रमुख छल। पाल कतेकौं राज्य के सैनिक के भर्ती केलक भाड़ा पर जाहिमे मालवा, खासा, हुना, कुलिका, कनराटा, लता, ओडरा आ मनहाली शामिल अछि। समकालीन लेख सभक अनुसार, राष्ट्रकूट लग सभसऽ निक पैदल सेना छल, गुर्जर-प्रतिहार लग सुन्दर घोड़सवार सेना छल आ पाल लग सभसऽ बड़का हाथी बल छल। अरब व्यापारी सुलेमान कहैत अछि कि पाल लग बलहारा संभवत: राष्ट्रकूट आ जुर्ज़ के राजा संभवतः गुर्जर-प्रतिहार के तुलना मे सेना छल। ओ इहो कहलक कि पाल सेना कपड़ा धोएलेल १०,००० -१५००० लोकके नियुक्त केलक । ओ आगु दावा करैत अछि कि लड़ाई के दौरान, पाल राजा ५०,००० युद्ध हाथी के नेतृत्व करैछल। सुलेमान के खाता अतिरंजित रिपोर्टों पर आधारित प्रतीत होएत अछि; इब्न खल्दून मे हाथि सभक संख्या ५,००० कहलगेल अछि। चूकि बंगाल मे घोड़ा के निक नस्ल नहि छल, पाल अपन घोड़सवार सभक कम्बोज सहित विदेशि सभसऽ आयात केलक। हुनका सँग एकटा नौसेना सेहो छल, जकर उपयोग व्यापारिक आ रक्षा दुन्नु उद्देश्य सभक लेल कएल जाएत अछि।

                                     

6. सुत्रसभ

पाल साम्राज्य के बारे मे जानकारी के मुख्य स्रोत सभमे शामिल अछि:

पाल खाता
  • रामचरितम, संस्कृत के एक महाकाव्य संधीकर नंदी १२म् शताब्दी
  • सुभासिता रत्नाकोसा, विद्याकार पाल शासन के अंत दिस द्वारा एक संस्कृत संकलन
  • विभिन्न एपिग्राफ, सिक्का, मूर्तिसभ आ वास्तुकला
  • रामचरित, अभिनन्द द्वारा संस्कृत के काज 9 म् शताब्दी
दोसर खाता
  • अरब व्यापारी सुलेमान 951 इस्वी सम्बत द्वारा सिलसिलेक्ट-तौरीख, जे पाल साम्राज्य के रुहमी वा रहमा कहलक।
  • डीपीएल दुस कीहि खोर लोइ चोस बस्कोर ग्या बाईंग खुंग्स नायर मख भारत मे बौद्ध धर्म के इतिहास तरानाथ १६०८, मे पाल शासन के बारेमे किछ पारंपरिक किंवदंति सभक श्रवण अछि।
  • एन-इ-अकबरी १६ म् शताब्दी
                                     

7. संदर्भ

ग्रंथसुची

  • Sengupta, Nitish K. 2011. Land of Two Rivers: A History of Bengal from the Mahabharata to Mujib. Penguin Books India. pp. 39–49. आइएसबिएन 978-0-14-341678-4.
  • क्रेवन, रॉय सी., इंडियन आर्ट: ए कंसाइस हिस्ट्री, १९८७, थेम्स आ हडसन अमरीका मे प्रेगर, आइएसबिएन ०५००२०१४६३
  • बगची, झुनु १९९३. बंगाल आ बिहार के पालक इतिहास आ संस्कृति, Cir. 750 A.D.–cir. 1200 A.D. अभिनव पब्लिकेशन. आइएसबिएन ९७८-८१-७०१७-३०१-४.
  • हार्ले, जे.सी., भारतीय उपमहाद्वीप के कला आ वास्तुकला, 2nd edn. 1994, Yale University Press. Pelican History of Art, आइएसबिएन ०३०००६२१७६
  • Paul, Pramode Lal 1939. बंगाल के प्रारंभिक इतिहास. Indian History. 1. Indian Research Institute. अन्तिम पहुँच तिथि: 28 March 2014.
  • Huntington, Susan L. 1984. "पाल-सेना" मूर्तिकला के स्कूल. Brill Archive. आइएसबिएन 90-04-06856-2.